Karnal Voice message November 2013



01 NOVEMBER

Morning :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों । आप सभी को CCAFS का नमस्कार। मौसम विभाग से और हरियाणा कृषि विश्व विद्यालय के धान अनुसंधान station, kaul से मिली जानकारी के अनुसार अगले तीन दिनों तक दिन में धूप रहेगी और मौसम शुष्क रहेगा। दिन का अधिकतम तापमान 29-30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14-15 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मौसम में धीरे धीरे ठण्ड बढती रहेगी। सुबह के समय हवा में नमी 45-50% और दोपहर में 20-25% रहने की सम्भावना है। 5-6 किलोमीटर प्रति घन्टे की रफ्तार से पूर्वा हवा चलेगी। अच्छे मौसम की सम्भावना को देखते हुए पकाव की अवस्था पर आई धान की फसल की कटाई करें। उपज को इस तरह सूखाये कि दानों में 14% तक नमी रह जाय। धान के खेत में कटाई के बाद आग न लगायें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



01 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों । आप सभी को CCAFS का नमस्कार। यदि आप इस साल गेहूँ का बीज खरीद रहे हैं तो विश्वसनीय स्रोत्र से प्रमाणित बीज ही खरीदें। वैसे भी तीन साल में एक बार बीज अवश्य बदलेना चाहिये। आप यह भी कर सकते हैं कि अपने एक तिहाई गेहूँ के खेत के लिये हर साल नई किस्म का प्रमाणित बीज खरीदें। इससे आपको हर साल नया बीज भी मिलता रहेगा और इस साथ पूरे क्षेत्र का बीज भी नहीं खरीदना पड़ेगा। प्रमाणित बीज में किसी भी किस्म की अनुवाहिक शुद्वता कम से कम 98% रहती है। इसी तरह प्रमाणित बीज का अंकुरण भी कम से कम 85% तो होता ही है और बीज में अधिकतम नमी 12% ही हो सकती है। प्रमाणित बीज लेने से बीज में किसी प्रकार के धोके की सम्भावना नहीं रहती। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



02 NOVEMBER

Morning:

यह संदेश CCAFS द्वारा करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों के लिये है। आप कणक की बीजाई की तैयारी कर रहें होगें। नवम्बर माह में दूसरे पखवाड़े में बुवाई करने के लिये आप को किसी एक किस्म का चुनाव करना है। इस समय जिन किस्मों की बीजाई कर सकते है उनमें wh-711, wh-912, wh-948, wh-1105, hd-2851, hd-3043, up-2338 और pbw- 550 की सिफारिश की गई। प्रमाणित बीज सरकार द्वारा मान्यता मिले स्थान से ही खरीदें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



02 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों के लिये यह संदेश CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। भरपूर उपज लेने से भूमि का उपजाऊ होना जरूरी है। भूमि कितनी उपजाऊ है ये निर्भर करता है भूमि से मिलने वाले पौध पौषक तत्वों पर। भूमि में पोषक तत्व कितनी मात्रा में यह जानकारी मिलती है। मिट्टी की जांच करा कर। हमें समय समय पर मिट्टी की जांच कराते रहना चाहिये। कम से कम हर दो साल में एक बार तो मिट्टी की जांच जरूर करवा लेनी चाहिये। साधरण तथा मिट्टी के जांच में तीन प्रमुख पोषक तत्वों -नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की उपलब्धि का ही अनुमान मिलता है। भूमि सुधार की भी थोड़ी जानकारी ले सकते हैं। भूमि में सूक्ष्म तत्वों का स्तर जांच ने लिये अलग से जांच करवानी होती है। अतः प्रमुख पोषक तत्वों की जांच के साथ सूक्ष्म तत्वों के लिये भी मिट्टी की जांच कराये। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



03 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों को CCAFS कि तरफ से दीपावली की शुभ कामनाएं। हम प्राथना करते है की आने वाला वर्ष हम सभी के लिये सुख और समृद्वि लेकर आये। अच्छी खेती का एक आधार स्वस्थ बीज भी है। जो बीज हम बुवाई के लिये काम में ले रहे हैं उसकी अंकुरण क्षमता पूरी है या नहीं यह जानना जरूरी है। अगर गेहूँ का प्रमाणित बीज खरीद कर काम में ले रहे हैं तो उसमें अकुंरण क्षमता कम से कम 85% तो रहेगी ही। अगर हम घर का ही बीज काम में ले रहे हैं तो अपने स्तर पर ही उसका अकुंरण देख लें। एक प्लेट में एक गीला कपड़ा या कागज बिछाकर 100 दाने गिन कर रखें। उसे बराबर गीला बनाये रखें। इस प्लेट को सुरक्षित स्थान पर रखें। तीन-चार दिन बाद सारे दाने अकुंरित हो जायेगें। अब अकुंरण को गिन कर उनका प्रतिशत देखें। यदि अकुंरण कम हुआ है उसी अनुसार बुवाई के लिये बीज की मात्रा बढा दें। एक बार आप सभी को दीपावली की शुभ कामनाएं।



04 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों । आप सभी को CCAFS का नमस्कार। गेहूँ की फसल में बुवाई के समय जो खाद डालनी है उसे बीज के 2‘ नीचे और 2‘ साइड में ऊरना चाहिये। Tractor के पीछे किसी भी तरह की seedcum fertiliser से खाद को सही ढंग से डाला जा सकता है। कुछ किसान भाई जो देशी हल से गेहूँ की बुवाई कर रहे है वो पोरे में खाद डालें और हल के पीछे कूड़ में बीज डाल कर हल्का सा पाटा लगा दें। मिट्टी की जांच या फिर Nutrient Expert की सिफारिश के अनुसार पोषक तत्वऑन और खाद की मात्रा तय करें। ऐसी खाद का प्रयोग करें जिसमें तीनों तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश एक साथ उपलब्ध हो। अगर तीनों तत्व के लिये अलग अलग खाद ले रहे हैं तो उन्हे उसी समय मिलाये जब खाद को काम में लेना है। बहुत पहले मिलाने से खाद हवा में नमी पकड़ सकती है जिससे खाद में ढेले पड़ जायेगे। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



04 NOVEMBER

Evening :

यह संदेश करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों के लिये CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। जब हम मिट्टी की जांच कराते हैं तो हमें नाइट्रोजन खाद की सिफारिश भूमि में उपलब्ध जैविक कार्बन यानि जीवांश की मात्रा से मिलती है। हमारी जमीनों में जीवांश की मात्रा बहुत कम होती जा रही है। अच्छी उपजाऊ भूमि में जैविक कार्बन की मात्रा 1% के करीब होनी चाहिये। अगर जैविक कार्बन की मात्रा आधा प्रतिशत से कम हो तो ऐसे खेतों में नाइट्रोजन की खाद के अलावा गोबर की खाद, कम्पोस्ट या हरी खाद देने की भी आवश्यकता रहती है। कभी कभी मिट्टी की जांच में सीधे तौर पर भूमि में नाईट्रोजन की उपलब्धता भी बताई जाती है यदि भूमि में उपलब्ध नाइट्रोजन की मात्रा 280 किलोग्राम प्रति हेक्टर या 112 किलोग्राम प्रति एकड़ से कम बताई जाय तो उसे भूमि में नाइट्रोजन कर स्तर कम या निम्न माना जायेगा। ऐसे में सिफारिश की मात्रा का 25% अधिक नाइट्रोजन खाद फसल को देना चाहिये।



05 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों । आप सभी को CCAFS का नमस्कार। मिट्टी की जांच में भूमि में उपलब्ध फास्फोरस की मात्रा के अनुसार फास्फोरस तत्व और खाद की सिफारिश की जाती है। भूमि में यदि उपलब्ध फास्फोरस की मात्रा 10 किलोग्राम प्रति हैक्टर यानि 4 किलोग्राम प्रति एकड़ से कम है तो भूमि के फास्फोरस का स्तर निम्न या कम माना जायेगा। यदि भूमि में उपलब्ध फास्फोरस 25 किलोग्राम / हेक्टर से ज्यादा है तो भूमि में फास्फोरस के स्तर को उच्च या अधिक माना जायेगा। साधारणतया फास्फोरस की उर्वरक सिफारिश मध्यम या औसत उर्वरक स्तर पर बनाई जाती है।और भूमि में उपलब्ध फास्फोरस के स्तर को देखते हुए अलग अलग खेत और फसल के लिये अनुशंसा की जाती है। मिट्टी की जांच करवाना लाभ दायक रहता है जिससे की आपके अपने खेत के लिये अलग से खाद की सिफारिश मिल सकें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



05 NOVEMBER

Evening :

यह संदेश करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों के लिये CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। अक्सर यह कहां जाता है कि हमारी भूमि में पोटाश तत्व की उपलब्धी का स्तर उच्च या ज्यादा है। लेकिन हम देखते हैं कि उच्च स्तर होने के बावजूद भी अगर पोटाश खाद फसल को दी जाती है तो यह जानना जरूरी है कि भूमि में पोटाश फसल कितना पोटाश जमीन से खीचती है। यदि भूमि में पोटाश की उपलब्धी 108 किलोग्राम प्रति हेक्टर है तो इस स्तर को निम्न या कम माना जायेगा और यदि भूमि में पोटाश की उपलब्धी 280 किलोग्राम / हेक्टर से अधिक है तो इस स्तर को उच्च या अधिक माना जाता है। मिट्टी की जांच या Nutrient Expert से प्राप्त सिफारिश लेकर ही आप खादों का प्रभावी उपयोग कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



06 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों ।आप सभी को CCAFS का नमस्कार। आजकल गेहूँ की फसल में उर्वरक उपयोग की सिफारिश में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश तत्व के साथ जिंक सल्फेट की भी सिफारिश की जाती है। जिंक हर साल डालने की आवश्यकता नहीं है। अगर आपने पिछले दो सालों में जिंक सल्फेट नहीं डाला है तो गेहूँ की बिजाई के समय प्रति एकड़ 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट 21% वाला अवश्य डालें। खड़ी फसल में जिंक की कमी के लक्षण दिखने पर भी आप जिंक सल्फेट यूरिया के साथ दे सकते है। जिंक की कमी के लक्षण फसल की 20-25 दिन की अवस्था से ही दिखाई देने लगते हैं। फसल की बढवार रूक जाती है। उपर से तीसरी पत्ती पर पीले धब्बे बन जाते है जो बाद में कत्थई भी हो सकते है। और पीला पन दूसरे पत्तों पर भी फैलने लगता है। जिंक की कमी दूर करने के लिये जिंक सल्फेट का SPRAY भी किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



07 NOVEMBER

Morning:

यह संदेश CCAFS की तरफ से करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों के लिये दिया जा रहा है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आज और कल आसमान में बादल छाये रह सकते हैं। छूट पूट वर्षा भी कही-कही हो सकती है इसके बाद आसमान साफ रहेगा। अगले शनीवार रविवार से मौसम गेहूँ की सामान्य और समय पर बुवाई के लिये उपयुक्त है। दिन का अधिकतम तापमान 26-27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 13-14 सेल्सियस डिग्री रहने का अनुमान है। सुबह के समय वातावरण में नमी 40-45% और दोपहर में 22-26% तक रह सकती है। पूर्वा हवा 6-9 किलोमीटर प्रति घन्टे के हिसाब से चलेगी। समय पर बुवाई के लिये सिफारिश की गई गेहूँ की किस्मों की बुवाई 10 नम्वबर से शुरू कर सकते हैं। बिजाई से पहले बीजोपचार करें और बिजाई के समय सिफारिश की गई खाद की मात्रा भी बीज के नीचे ऊर कर दें। धन्यवाद।



08 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। साधारणतया एक एकड़ क्षेत्र के लिये गेहूँ की चालिस किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। बीज की मोटाई, बुवाई के समय और बीज की अकुंरण क्षमता को ध्यान में रखते हुए बीज की मात्रा बढाना आवश्यक हो जाता है। मोटे दाने के गेहूँ की किस्मे, जिनके एक हजार दानों का वजन पचास ग्राम से अधिक होता है, उनमें बीज की मात्रा पचास किलोग्राम प्रति एकड़ रखनी चाहिये। इसी तरह पिछेती बिजाई में भी बीज की मात्रा पचास किलोग्राम प्रति एकड़ रखें। प्रमाणित बीज की अकुंरण क्षमता कम से कम पच्यासी प्रतिशत होती है। इससे कम अकुंरण क्षमता वाले बीज में भी बिजाई के लिये मात्रा वाले बढा देनी चाहिये। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



08 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों। आप सभी को CCAFS का नमस्कार। गेहूँ की बीजाई का समय नजदीक आता जा रहा है। गेहूँ की बीजाई का सबसे अच्छा तरीका यही है कि बीजाई seed cum- fertiliser drill से करें। चाहे खेत तैयार कर या बिना खेत तैयार किये धान के खेत की नमी का फायदा उठाते हुए zero tillage पद्वति अपनाते हुए बीजाई करें seed cum- fertiliser drill से बीजाई करना ही गेहूँ की बीजाई का सबसे अच्छा तरीका है। यदि यह उपलब्ध नही है तो बीजाई पोरा केरा विधि से करें। zero tillage पद्वति से बीजाई में मजदूरी व डीजल/तेल का खर्चा बचता है। खरपतवार नियंत्रण में भी मदद मिलती है और उपज भी ज्यादा प्राप्त होती है। बीज को पांच सेन्टीमीटर गहरा बोयें। इससे ज्यादा गहरा बोनें पर अकुंर जमीन से बाहर नहीं निकल पायेगा। कतार से कतार की दूरी 22 सेन्टीमीटर रखें। धन्यवाद।



09 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । आप सभी को CCAFS का नमस्कार। गेहूँ की SEED DRILL से शुरू करने से पहले यह जान लेना आवश्यक है कि DRILL से बीज सही मात्रा में गिर रहा है या नहीं। सिफारिश की गई बीज की मात्रा और कतार से कतार की दूरी बनाये रखने के लिये drill का calibration करना होता है। seed drill को बिजाई कार्य आरम्भ करने से पहले ही सेट कर लें। इसके लिये बीज भर कर seed drill को एक एकड़ के नाप को ध्यान में रखते हुए चलायें। हर TUBE से बीज के अलग अलग दाने इक्ठा करें। हर TUBE के साथ एक थैली या TIN लगाकर बीज इक्ठा करना होगा। इस बीज का वजन देख लें और जांचे की सही मात्रा में बीज गिरा है या नहीं। अगर बीज कम या ज्यादा मात्रा में गिर रहा है तो लीवर की सहायता से उसे सेट करें। जब कतपसस खेत में चल रहा है तो भी ध्यान दें की हर जनइम से बराबर बीज गिर रहा है। धन्यवाद।



09 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों ।आप सभी को CCAFS का नमस्कार। धान की कटाई के बाद खेत में पराली को जलाये नहीं इससें पर्यावरण तो खराब होता ही है साथ ही यह मनुष्य और पशुओं के स्वास्थ के लिये भी हानिकारक है। साथ ही बहुत से पोषक तत्व और जीवांश जो भूमि को मिलने चाहिये थे वो भी नष्ट हो जाते हैं। आप बिना धान की पराली जला कर भी zero tillage पद्वति अपना कर समय पर गेहूँ की बुवाई कर सकते हैं। पराली को खेत में मिला देने से भूमि की ताकत बढती है, पोषक तत्व मिलते है, जीवांश बढने से भूमि की जल धारण क्षमता बढती है, भूमि में सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या भी बढती है जो फसल और भूमि दोनों के लिये उपयोगी है। धान की पराली को नहीं जलाना जलवायु परिवर्तन रोकने तथा भूमि के स्वास्थय को बरकरार रखने में सहायक होगा। धन्यवाद।



10 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अगले तीन चार दिन तक आसमान साफ रहेगा और दिन में धूप रहेगी। दिन का अधिकतम तापमान 26.27 डिग्री सेल्सियस रहेगा तथा न्यूनतम तापमाम 13-14 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। यह समय गेहूँ की सामान्य व समय पर बिजाई के लिये सबसे उपयुक्त रहेगा। हवा में नमी सुबह के समय 35-45% और दोपहर में 20-30% तक रह सकती है। पश्चिमी हवा 6-9 किल¨मीटर प्रति घन्टे की रफतार से चलेगी। मौसम का लाभ उठाते हुए गेहूँ की बिजाई करें। ZERO TILLAGE पद्वति अपनाते हुए HAPPY SEEDER से बिजाई कर सकते हैं। धान के खेत में पराली को जलायें नहीं उसे खेत में ही रहने दें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



10 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों। आप सभी को CCAFS का नमस्कार। गेहूँ की खेती में कुछ ऐसे भी उपाय है जिनमें पैसा खर्चा तो नहीं होता पर समझदारी से काम किया जाय तो उपज भरपूर मिलती है। ऐसा एक उपाय है गेहूँ की समय पर बुवाई। उपयुक्त समय के बाद बुवाई करने पर हर एक दिन की देरी से उपज में कमी आती जायेगी। इसी तरह किस्म का चुनाव भी उपज पर प्रभाव डालता है। आप के जिले के लिये सिफारिश की गई किस्म की ही बिजाई करें। रोग रोधी किस्मों को प्राथमिकता दें। उन किस्मों में से किसी एक किस्म का चुनाव करें जिसमें रोली लगने की सम्भावना नहीं है। बीज को बारह घण्टे पानी में भिगोकर बुवाई करने से अकुंरण जल्दी होगा। इस तरफ के कुछ उपायों पर पैसा तो कुछ भी नहीं लगता लेकिन भरपूर उपज का लाभ मिलता है। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



11 NOVEMBER

Morning :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों। आप सभी को CCAFS का नमस्कार। रबी में गेहूँ की खेती की तैयारी आपने पूरी कर ली है। इस बार हम को गेहूँ की खेती पर हो रहे खर्चे का हिसाब भी रखना है और यह देखना है कि हमारे बताये हुए कुछ तरीकों से आपकी लागत में कितनी कमी हुई है और आमदनी में कितना इजाफा हुआ है। ZERO TILLAGE अपनाने से DIESEL की खपत में कितनी बचत हुई। जीवाणु खाद देने से और NUTRIENT EXPERT की सिफारिश से पोषक तत्व के उपयोग और लागत में कितनी कमी आई है। समय पर बुवाई और सिंचाई करके लागत में कितनी कमी आई और उपज कितनी बढी। मजदूरी कितनी कम हुई। इसी तरह खर्चे और आमदनी के हर छोटे पहलू पर ध्यान देना है। घर में किसी भी व्यकित को एक जिम्मेदारी सौपे कि वो हर दिन खेती में मजदूरी, खाद-पानी-दवा सब का लेखा जोखा रखें। खेती को एक लाभप्रद व्यवसाय बनाने के लिये लेखा जोखा रखना आवश्य है। किसी और जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



11 NOVEMBER

Evening :

यह संदेश CCAFS की तरफ से करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों के लिये दिया जा रहा है। हम आपको याद दिलाना चाह रहे हैं कि गेहूँ की बिजाई से पहले बिजोपचार करना न भूले। सबसे पहले दीमक से बचाव के लिये 40 किलोग्राम बीज को 60 मिली लीटर क्लोरपाइरीफास 20 ई.सी. का दो लीटर पानी में घोल बना कर उपचारित करें। उसके बाद रोगों से बचाव के लिये वीटावेक्स या बैविस्टिन की 80 ग्राम मात्रा से और सबसे बाद में एजोटोबेक्टर और Phosphobectrium जीवाणु खाद से उपचार करें। बीजोपचार कर अपनी फसल को सुरक्षित रखें और भरपूर उपज लें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हेल्पलाइन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



12 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में गेहूँ के खेतों में खरपतवार ज्यादा होते हैं और खुरपी या कसोले से खरपतवार निकलने के लिये मजदूर नहीं मिलते हैं वहा रसायनों का उपयोग कर खरपतवार नियंत्रण किया जा सकता है। गेहूँ की बुवाई के तुरन्त बाद बुवाई के दो दिनों के अन्दर पेन्डिमेथेलीन 30 ई.सी. (स्टाम्प) का 400 ग्राम सक्रिय तत्व यानि (सवा लीटर दवा) 250-300 लीटर पानी में मिला कर एकड़ क्षेत्र पर गुल्ली डण्डा और जगंली जई का नियंत्रण हो जायेगा। खड़ी फसल में सभी प्रकार के खरपतवार के नियंत्रण के लिये सल्फो सल्फूरोन (लीडर) का 13 ग्राम सक्रिय तत्व 250-300 लीटर पानी में घोलकर खरपतवारी नाशी बाजार में मिल रहे हैं उनकी पूरी जानकारी लेकर प्रयोग करें। संवेदन शील गेहूँ की किस्मों और फसल चक्र में अपनाई जाने वाली दूसरी फसलों पर खरपतवार नाशी दवा के प्रभाव के प्रति सावधान रह कर दवा का प्रयोग करें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



12 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। गेहूँ की फसल में एक बार में कितना पानी दें, यह जानना जरूरी है। हर बार उतना ही पानी दें जिससे कि फसल की जड़ की गहराई तक की भूमि गीली हो जाय। अगर इससे ज्यादा पानी दिया तो पानी में घुलनशील पोषक तत्व खास करके नाइट्रोजन पानी में घुल कर जड़ क्षेत्र से नीचे चले जायेगें और पौधों को उपलब्ध नहीं रहेगें। इस से कम पानी दिया तो जड़ों की गहराई भी उतने ही क्षेत्र तक सीमित रह जायेगी जितनी की जमीन गीली है। जड़ों के छोटा रहने से पौधों की जमीन से पकड़ कम रह जायेगी और फिर कभी तेज हवा चलने पर पौधे आड़े गिर सकते हैं। आरम्भिक अवस्था में जब जड़ों का पूरा विकास नहीं हुआ है हल्की सिंचाई दें। बाद में पूर्ण विकसित फसल को 3 इन्च गहराई का पानी दें। रेतीली मिट्टी में एक इन्च गहरी सिंचाई 12 इन्च तक भूमि को गीला कर सकती है। भारी मिट्टी में इतना पानी लगभग 6 इन्च गहराई तक मिट्टी गीली करेगा। गेहूँ की फसल को ज्यादा गहरा पानी न दें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



13 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। गेहूँ की बुवाई का समय आ गया है। यदि आप को खेत तैयार करने में कुछ दिन लगने से बुवाई में देरी होने की सम्भावना है तो आप ZERO TILLAGE पद्वति अपनाते हुए भी HAPPY SEEDER की मदद से गेहूँ की बिजाई कर सकते हैं। ZERO TILLAGE तकनीक अपनाने से खेत तैयार करने में जुताई का जो समय लगता है, उसकी बचत हो जाती है। खेत तैयार करने के लिये बार बार जुताई करने की आवश्यकता नहीं होती तो इससे खेती की लागत भी कम हो जाती है। धान के खेत में कटाई के समय भूमि में जो नमी उपलब्ध है उसकों काम में लेते हुए गेहूँ की बिजाई हो जाती है इसलिये इस पद्वति से पलेवा सिंचाई की भी आवश्यकता नहीं रहती। समय से बुवाई हो जाने से गेहूँ को बढवार का पूरा समय मिल जाता है और फसल के पकाव की अवस्था तक गर्मी न होने से दाना सुकड़ता नहीं। ZERO TILLAGE तकनीक अपनाने से लागत कम और उपज में वृद्वि होती है। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



13 NOVEMBER

Evening :

यह संदेश CCAFS की तरफ से करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों के लिये दिया जा रहा है। सामान्यतः गेहूँ की खेती सिंचित अवस्था में की जा रही है। नहरों और TUBE WELL से सिंचित के लिये पानी उपलब्ध है। समतल भूमि में लम्बी क्यारियां बना कर गेहूँ में सिंचाई करनी चाहिये। कभी कभी किसान भाई पूरे एक एकड़ या अधिक क्षेत्र में ही पानी छोड़ देते हैं। जिससे दूसरे किनारे या कोने पर काफी पानी इक्ठा हो जाता है और फसल उस क्षेत्र में कमजोर हो जाती है। असमतल-ऊंच-नीच वाली भूमि में फुव्वारा पद्वति (sprinkler) से सिंचाई करने से पूरे क्षेत्र में एक सार पानी दिया जा सकता है। जल एक सीमित साधन है उसकी बरबादी न होने दें। खेत में एक सर सिंचाई हो सकें वही पद्वति अपनायें। इससे पानी की भी बचत होगी, TUBE WELL से पानी निकालने में खर्चा भी कम होगा और फसल का नुकसान होने से भी बचाव रहेगा। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



14 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों। नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के धान अनुसंधान केन्द्र, ज्ञंनस और मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अगले तीन दिनों में आपके जिले में आसमान साफ रहेगा हालांकि सुबह थोड़ी धुन्ध रह सकती है। रात के तापमान में गिरावट आयेगी और ठण्ठ बढेगी। दिन का अधिकतम तापमान 24-26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 8-10 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। मौसम शुष्क रहेगा सुबह के समय हवा में नमी सिर्फ 25-30% दोपहर में 15-20% रह सकती है। गेहूँ की समय पर बुवाई के लिए सिफारिश की गई किस्मों की बिजाई करें और पहले बताये गये तरीके से बीजोपचार करें। बिजाई के समय नाइट्रोजन, फास्फोरस पोटाश और जिंक खाद का उपयोग करें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



14 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। किसी भी फसल में कीड़ों का प्रकोप देखा जा सकता है। हालाकि गेहूँ की फसल में कीड़ों से इतना नुकसान नहीं होता फिर भी दीमक, सतही टिड़्डा और चेपा व तेला गेहूँ की फसल को नुकसान करते देखे जा सकते हैं। दीमक अंकुरण के समय से लगाकर बाद तक खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। सतही टिड्डा अंकुरित गेहूँ के लिये बहुत हानिकारक होता है। यह पौधे को जमीन के पास से काटता है। चेपा या तेला का प्रकोप गेहूँ की बालियां निकलने के बाद फरवरी-मार्च में ज्यादा देखने को मिलता है। यह कीट पत्तियों और बालियां का रस चूस कर फसल को नुकसान पहुंचाता है। दीमक से बचाव के लिये हमने आपको बीजोपचार, भूमि उपचार और सिंचाई के साथ क्लोरपाइरीफॉस दवा का उपयोग बताया था। टिड्डे के नियंत्रण के लिये प्रति एकड़ 10 किल¨ग्राम मिथाइल पैराथियान 2% घूल बिखेरे। कीट नियंत्रण की अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



15 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों। नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। गेहूँ में फसल के बढवार की अवस्था और सिंचाई का विशेष सम्बन्ध है। बौने गेहूँ के पहली सिंचाई बिजाई के 20-25 दिन बाद जब शीर्ष जड़/ चन्देरी जड़/ शिखर जड़ निकलने की अवस्था पर करना चाहिये। देशी गेहूँ में पहली सिंचाई 30-35 दिन बाद तक की जा सकती है। बौने गेहूँ में कल्ले एक साथ फुटते हैं। शीर्ष जड़ या शिखर जड़ के साथ ही कल्ले निकलते हैं। इस अवस्था पर भूमि में पर्याप्त नमी रहनी चाहियें। नमी नहीं होने से कल्ले नहीं बनेगें और बालियां कम बढेगी जिससे उपज में भारी नुकसान होगा। इसलिये बौने गेहूँ में पहली सिंचाई बिना किसी चूक के बुवाई के 20-दिन बाद अवश्य दें। इस अवस्था पर गेहूँ को अंकुरित पौधों में चौथी पत्ती बन जाती है। बौनी गेहूँ में पहली सिंचाई शीर्ष या शिखर जड़ की अवस्था पर देना अनिवार्य है इस बात का पूरा ध्यान रखें। धन्यवाद।



15 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। वैसे तो गेहूँ की जिन किस्मों या प्रभेदों की आपके जिले के लिये सिफारिश की गई वो ज्यादातर रोग रोधी हैं। लेकिन मौसम अनुकूल नहीं होने पर कभी कभी इन किस्मों पर भी रोग के लक्षण दिखाई देते हैं। पीला, भुरा या काला रतुआ जिन्हे रौली रोग भी कहते हैं और कंगयारी या अनावृत कलिका, करनाल बंट काला सिरा, सेहू, झुलसा और मौभ्या गेहूँ के प्रमुख रोग हैं। गेहूँ को रोग रहित रखने के लिये रोग रोधी किस्मों के चुनाव के साथ बीजोपचार अवश्य करें। हमने आपको बीजोपचार के लिये वीटावेक्स या बैविस्टिन या थीरम या टैब्यूकोनाजोल यानि रेक्सिल-2 डी.एस. दवा काम में लेने कि सलाह दी थी। तो बिजाई से पहले बीजोपचार अवश्य करें। खड़ी फसल में बीमारी की रोकथाम की जानकारी हम उचित समय पर आपको देगें। CCAFS द्वारा प्रसारित संदेशों को लगातार सूनते रहें। धन्यवाद।



16 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। गेहूँ की फसल में हम खरपतवार नाशी दवाईयों का इस्तेमाल करते हैं। इन दवाईयों के उपयोग में हमें कुछ सावधानियां बरतनी चाहियें। सबसे पहले तो इस बात का ध्यान रखें कि दवा की जितनी मात्रा की सिफारिश की गई है उतनी मात्रा का ही घोल बनायें। खरपतवार नाशी दवा के छिड़काव के लिये फसल की अवस्था भी बताई गई है उसी अवस्था पर छिड़काव करें। गेहूँ के खेत के आसपास और फसल चक्र में बोई गई फसलों का भी ध्यान रखना है। खरपतवार नाशी दवा का स्प्रे सदैव फ्लेट फैन नोजल से ही करें। जब चौड़ी पत्ती वाली खरपतवार के लिये 2-4 D का छिड़काव कर रहे तो ध्यान दे कि छिड़काव पड़¨स के खेत पर हवा के साथ किसी चौड़ी पत्ती वाली फसल चना, मटर, सरसों आदि पर नहीं गिर रहा हो। खरपतवार नाशी दवा का सही इस्तेमाल कर इसे पूरा फायदे बंद बनायें। धन्यवाद।



16 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS के द्वारा दिया जा रहा है। गेहूँ की बुवाई के बाद यह देखना जरूरी है कि खेत में जमाव ठीक हुआ है या नहीं। फसल की उपज इस बात निर्भर करेगी कि कुल कितना अकुंरण हुआ है और हर पौधे पर बालियां कितनी आई हैं। जितना हम बीज डालते हैं वो पूरा नहीं उगता और बीज की अकुंरण क्षमता भी लगभग 85% रहती है। ऐसे में यह जरूरी है कि बुवाई के बाद हम यह देखे कि अकुंरण कैसा हुआ है। एक वर्ग मीटर क्षेत्र में यदि लगभग 200 दाने उग आये हैं तो सन्तोषजनक जमाव मानना चाहिये। पौधों की संख्या अच्छी उपज का आधार बन जायेगी। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



17 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। मौसम विभाग से मिली जानकरी के अनुसार आपके जिले में अगले तीन-चार दिनों तक मौसम साफ व शुष्क रहेगा। दिन का अधिकतम तापमान 26-27 डिग्री सेल्सियस रहने का न्यूनतम तापमान 11-13 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। सुबह के समय हवा में नमी सिर्फ 25-35% और दोपहर में 15-17% किलोमीटर प्रति घन्टा की रफ्तार से चलेगी। गेहूँ में सामान्य और समय बिजाई का काम जल्दी से जल्दी पूरा कर लेना चाहियें। धन्यवाद।



17 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों CCAFS का नमस्कार। यदि आप किसी कारण गेहूँ की समय पर बीजाई नहीं कर पाये हैं तो आप को अब देर से बुवाई के लिये सिफारिश की गई किस्मों में से किसी एक किस्म का चुनाव करना चाहिये। देर से बिजाई का मतलब है कि आप गेहूँ की बिजाई दिसम्बर के पहले या दूसरे सप्ताह में गेहूँ की बुवाई कर रहें हैं। इससे देर से गेहूँ की बिजाई करने पर उपज बहुत कम मिलती है। देर से बिजाई के लिये जिन किस्मों की सिफारिश की गई है उनमें है pbw-373,raj-3765 और wh- 1021 देर से बिजाई करने पर भी फसल को सही पकाव के लिये 125-130 दिन का समय चाहिये। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



18 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS के द्वारा दिया जा रहा है। गेहूँ में दीमक का प्रकोप शुरू से देखने को मिल सकता है। दीमक पौधे की जड़े खाते हैं जिस कारण पौधा सूख जाता है। इन पौधों को आप अगर हाथ से खीचेगें तो ये आसानी से बाहर आ जायेगा। खेतों में दीमक का प्रकोप दिखाई देने पर दो लीटर पानी में मिलायें। फिर इस घोल को लगभग 20 किलोग्राम रेत में एक सार मिलाकर गेहूँ के एक एकड़ खेत में बिखेरें और उसके बाद सिंचाई करें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



18 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS के द्वारा दिया जा रहा है। गेहूँ की फसल की अलग अलग अवस्था पर हम किसी न किसी कृषि कार्य की सिफारिश करते हैं। फसल के अकुंरण के बाद जिन अवस्थाओं का अकसर जिक्र किया जायेगा इनमें प्रमुख अवस्थाए हैं शीर्ष या शिखर जड़ें निकलने की अवस्था जो बुवाई के 20-25 दिन बाद आती है। उसके बाद कल्ले फुटने की अवस्था, तने में गांठ बनने की अवस्था, गाभा या ध्वज अवस्था, बलिया बनने की अवस्था, दाने बनने की अवस्था, खासकर दाने की दूधिया अवस्था और बाद में दाने की पकाव की अवस्था और पुर्ण पकाव की अवस्था। हमने आपको शीर्ष या शिखर जड़ के निकलने पर पहली सिंचाई के बारे में जानकारी दी थी। फसल की अन्य अवस्था के कृषि कार्य के बारे में समय समय पर जानकारी देते रहेगें। इन संदेशों को लगातार सुनते रहियें। धन्यवाद।



19 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। गेहूँ में जिंक की कमी के लक्षण बुवाई 25-30 दिन बाद दिखाई दे सकते हैं। जस्ते की कमी से प्राप्त बीच के पत्तों पर हल्के पीले रंग के अनियमित धब्बे आ जाते हैं जो बाद में आपस में मिल कर बड़े हो जाते हैं। जिंक की ज्यादा कमी होने पर पत्तियाँ मूड़ जाती हैं। और शिथिल हो कर बीच में गिर जाती है। पौधों की बढवार भी रुक जाती है। वैसे तो बुवाई के समय 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट 21% एक एकड़ क्षेत्र में बिजाई से पहले खेत में देना चाहियें। लेकिन खड़ी फसल में जिंक की कमी के लक्षण दिखाई दे तो आधा प्रतिशत यानि 100 लीटर पानी में आधा किलोग्राम जिंक सल्फेट के साथ ढाई किलोग्राम यूरिया या 250 ग्राम चूना मिलाकर बिजाई के 35-40 दिन पर छिड़काव करें। और आवश्यकता हो तो एक या दो छिड़काव 15 दिन के अन्तर से फिर करें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



19 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों आप सभी को CCAFS का नमस्कार। फसलों में खाद, दवा और खरपतवार नाशी रसायनों का छिड़काव करने के लिए हमें मानव चलित या शक्ति चालित छिड़काव पंप यानि स्प्रेयर की जरूरत होती है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के अन्दर छिड़काव पंप खरीदने के लिए 50% अनुदान उपलब्ध है। यह राशि मानव चलित छिड़काव पंप के लिए 450 रुपये प्रति उपकरण तथा शक्ति चलित उपकरण के लिए 2000 रुपये प्रति उपकरण की दर प्रदान की जाती है। कृषि विभाग से सम्पर्क कर अनुदार राशि का लाभ उठाये। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



20 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS के द्वारा दिया जा रहा है। गेहूँ की खेती प्रायः सिंचित अवस्था में करते हैं। पानी का सही उपयोग हो इसके लिये आवश्यक है खेत में उपयुक्त आकार की क्यारियां बनाई जाय। इसके लिये पहली सिंचाई देने के लिये फसल की अकुंरण की अवस्था पर ही क्यारियां बना लेनी चाहियें। नहरी क्षेत्र में अक्सर बिना क्यारियां बनाये सिंचाई की प्रथा है जिससे पानी का ठीक से नियंत्रण नहीं रह पाता है। पानी एक सार भी नहीं लगता बहुत से बार खेत से पानी बाहर भी चला जाता है या खेत में ही किनारे या कोने पर इक्ठा हो जाता है। खेत में खड़ा पानी फसल पर बुरा असर डालता है और जमीन खराब होने की भी आशंका रहती है। सिंचाई के पानी को नियंत्रित रखने के लिये लम्बी क्यारियां बनाना सही रहता है। समतल खेत में भी पानी के एक सीरे से दूसरे सीरे तक पहुंचने के समय को ध्यान रखें और आवश्यकतानुसार ही पानी लगायें। धन्यवाद।



20 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। जैसे जैसे सर्दी बढ रही है सुबह या शाम के समय कुछ लोग घास-फूस और सूखे पत्तो को जलाकर सर्दी से बचने का उपाय करते हैं। ऐसा करना अमूल्य जीवांश की बरबादी है। साथ ही इस तरह से आग लगाने पर वातावरण में कार्बन डाई गैस की मात्रा भी बढती है जो फसल मानव, पशु और पर्यावरण सभी के लिये हानिकारक है। घास-फूस और सूखे पत्तों को जलाने के बजाय उनका कम्पोस्ट बनाने में उपयोग करें। जिससे भूमि में जीवांश की मात्रा बढेगी, भूमि का स्वास्थ अच्छा रहेगा। भूमि को पोषक तत्व भी मिलेगें, उसकी भौतिक दशा भी ठीक रहेगी। किसी भी तरह के फसल अवशेष को जलाने से बचे। यहां तक की खाना पकाने के लिए भी धुआ रहित चुल्हों और प्राकृतिक उर्जा स्तोत्र का सहारे लें। पर्यावरण को साफ रखने से खेती में लाभ मिलता है, अन्य जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



21 NOVEMBER

Morning :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS के द्वारा दिया जा रहा है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आज और अगले तीन दिन तक आपके जिले में मौसम साफ और शुष्क रहेगदिन का अधिकतम तापमान इन दिनों में 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 12-13 डिग्री सेल्सियस रहने क अनुमान है। सुबह के समय हवा में नमी 26 से 43% और दोपहर में 15-21% रहने की सम्भावना है। आज और कल पूरवा हवा 4 किलोमीटर प्रति घन्टे की रफतार से और उसके बाद शनिवार और रविवार को 7-11 किलोमीटर प्रति घन्टे की रफतार से पिछवा हवा चलने का अन्देशा है। आपके गांवों में अधिकतर गेहूँ की बिजाई पूरी हो गई है। अब खेत में अकुंरण, अकुंरण के बाद दीमक प्रकोप और अकुंरण से पहले यदि खरपतवार नियन्त्रण करना हो तो इन बातों पर ध्यान दें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



22 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । आप सभी को CCAFS का नमस्कार। गेहूँ कीबुवाई के बाद और अकुंरण होने पर खेत पर निगरानी रखना आवश्यक है। गेहूँ की फसल के शुरुवाद में ही सतही टिड्डे का आक्रमण देखने को मिल सकता है। यह कीट अकुंरित गेहूँ के लिये बहुत ही हानीकारक हो सकता है। यह पौधों को जमीन के पास से काट कर नुकसान पहुंचाता है। सतही टिड्डे की रोकथाम के लिये 10 किलोग्राम मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत पाउडर एक एकड़ क्षेत्र पर डालें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



22 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। अब फसलों में मुख्य पौषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के अलावा कुछ सूक्ष्म तत्वों की कमी भी देखने को मिलती है। जिंक और व बोरोन की कमी का जिक्र कई बार हुआ है। लोहा या आयरन तत्व की कमी भी अब गेहूँ की फसल में खास कर उन खेतों में देखने को मिलती हैं जिनका पी.एच. 8 से ज्यादा है। TUBE WELL के पानी में बाईकार्बोनेट की मात्रा ज्यादा होने पर भी लोहे की उपलब्धता घटने से उसकी कमी के लक्षण देखे जा सकते हैं और जहां मिट्टी में चुने की मात्रा अधिक हो लोह तत्व की कमी से गेहूँ की फसल में नई पत्तियों पर पीलापन दिखाई देता है लेकिन पुरानी पत्तियां हरी ही रहती हैं। पौधों की बढवार भी रुक जाती है। भूमि में लोहे की उपलब्धता बढाने के लिये खेत में जिप्सम का प्रयोग किया जान चाहियें। लोहे की कमी दूर करने के लिये गेहूँ की फसल पर फौस सल्फेट हरा सीस का आधा घोल 8-10 दिन के अन्तर पर 2-3 बार छिड़कें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



23 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। कल हनमे आपको फसल सूक्ष्म तत्व लोहे-आयरन की कमी के लक्षण और उसके उपयोग के बारे में बताया था। आज हम आप को गेहूँ में मैंगनीज की कमी और उसके उपयोग के बारे में जानकारी देगें। गेहूँ की फसल में मैंगनीज की कमी के लक्षण शुरू की बढवार की अवस्था में तथा बालियां निकलने की अवस्था में दिखाई देते हैं। उपर की पत्तियों पर भूरे-पीले रंग की धारियां पत्तों के सिरे से बनती हुई नीचे की ओर फैलती है। पौधों की बढवार रुक जाती है। बालियां देर से निकलती है और मुड़ी हुई निकलती है। मैंगनीज की कमी के लक्षण दिखाई देने पर एक किलोग्राम मैंगनीज सल्फेट को 200 लीटर पानी में घोल कर एक एकड़ क्षेत्र पर छिड़काव करें। 10 से 15 दिन के अन्तर पर 2-3 छिड़काव करें। छिड़काव फसल की आरम्भिक अवस्था से ही किया जाना जाहिये। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



23 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । CCAFS का नमस्कार। गेहूँ और अन्य रबी फसलों की बुवाई का काम पूरा हो जाने के बाद कुछ समय के लिये TRACTOR का उपयोग बंद हो जाता है। कार्य खत्म हो जाने पर ट्रैक्टर को धोकर खड़ा करना चाहिये। मिट्टी-कीचड़ लगे रहने से उसका रंग खराब हो जाता है। यदि ट्रैक्टर कुछ दिनों के लिये खड़ा करना है तो 4 पौड प्रति वर्ग इन्च अतिरिक्त हवा भर कर किसी छत के नीचे खड़ा करना चाहिये या उसे त्रिपाल आदि से ढक देना चाहिये। ट्रैक्टर को काम पर निकालने से पहले डीजल की टंकी, गीयर बाक्स, फिल्टर, रेडियटर की जांच करलें। टायर की हवा चेक कर लें। यह देखें की इंजन से काला धुंआ नहीं आ रहा हो । वी बेल्ट भी सही कसी हो । कल्च और ब्रेक सही काम कर रहे हो और किसी तरह की खट खट की आवाज नही आ रही हो। ट्रैक्टर के रख रखाव में सावधानी बरते। डीजल-पानी की जांच करते रहें और समय पर तेल बदले और ग्रीस लगायें। सही देख भाल कर आप ट्रैक्टर को लम्बे समय तक काम में ले सकते हैं। धन्यवाद।



24 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। गेहूँ की फसल में मुख्यत गेहूँ का मामा, जगंली जई, बधुआ, जगंली पालक, कृष्णनील, हिरनखुरी आदि खरपतवार ज्यादातर देखने को मिलते हैं। चूकि हाथ से खरपतवार निकालने में अधिक मजदूरी लगती है रसायनिक खरपतवार नियंत्रण सुगम और लाभकारी रहता है। गेहूँ बोने के तीनन्डिमेथिलीन (स्टोम्प 30 ई.सी.) कई 500 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ क्षेत्र पर छिड़के। इससे चौड़ी पत्ती और घास वर्गीय खरपतवार नियंत्रित हो जायेगें यदि इस समय आप दवा छिड़कने से चूक जाय तो बुवाई के 25-दिन बाद कुछ मिले जुले खरपतवारी नाशी जैसे एकोर्ड़ प्लेस, एटलांटिस, वेस्टा, टोटल आदि रसांयनों में से किसी एक को उसके डिब्बे पर लिखी मात्रा और सावधानियों का ध्यान रखते हुए छिड़काव करें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



24 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों ।CCAFS का नमस्कार। गेहूँ की खड़ी फसल में खाद के रुप में यूरिया का प्रयोग करना है जिससे की फसल की नाइट्रोजन की आवश्यकता पूरी की जा सकें। पौधों को धीरे धीरे लम्बे समय तक यूरिय से नाइट्रोजन मिलता रहें। इसके लिये यूरिया को नीम की खली या नीम के तेल से उपचारित किया जाता है। अब कई कम्पनियों का नीम लेपित यूरिया बाजार में उपलब्ध है। साधारण यूरिया के मुकाबले नीम लेपित यूरिया अधिक प्रभावशाली रहता है। प्रभावी उपयोग के कारण यूरिया की मात्रा 10% कम हो जायेगी। साथ ही यूरिया से निकलने वाले नाईट्रोजन धीरे धीरे उपलब्ध होने के कारण उसका पानी में रिसाव कम हो जायेगा। नीम लेपित यूरिया काम में लेने से उपज में वृद्वि होती है और साथ ही पैसे और पर्यावरण दोनों की बचत होती है। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



25 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों ।CCAFS का नमस्कार। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आज और अगले तीन दिनों में आपके जिले में मौसम साफ और शुष्क रहेगा। आज और कल आसमान में आशिंक रुप से हल्के बादल दिखाई दे सकते हैं लेकिन वर्षा की सम्भावना नही है। इन दिनों में दिन का अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 12 से 14 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। सुबह के समय हवा में नमी 30 से 35% और दोपहर में 15 से 20% रह सकती है। पिछुआ हवा 7 से 12 किल¨मीटर घन्टे की रफतार से चलेगी। जिन किसान भाइयों ने गेहूँ की बिजाई नही की है वह जल्दी से उसे पुरा करें जिन खेतों में अंकुरण हो गया है वहां दीमक के प्रकोप को देखो अंकुरण से पहले खरपतवार नाशी दवा का प्रयोग करें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



25 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। सर्दियों में दुधारु पशुओं की विशेष देख रेख की आवश्यकता है। पशुओं को रात में खुले में न बांधे यदि खुली जगह में बांधना ही पढे तो उनके ऊपर ताट या जूट की बोरी का ओढना रखें। मौसम शुष्क होने के कारण दुधारु पशु के थनों को सुखने और फटने की रह सकती है। थनों को दूध निकालने के पहले और बाद में गुनगुने गर्म पानी से अवश्य धोयें। थनेला रोग की सम्भावना ठंड में बढ सकती है उसका खयाल रखें। पशुशाला को साफ और सुखा रखें। हमेशा बिछावन भी बदले तथा पशुओं को सर्दी तथा ठंड़ी हवा से बचाये पशु की खुराक और पानी का भी पूरा ध्यान रखें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



26 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। गेहूँ या किसी भी फसल को पानी की कितनी आवश्यकता है यह निर्भर करता है कि फसल और भूमि से कितनी मात्रा में पानी का वाष्पीकरण हुआ है कुल कितना वाष्पीकरण होगा यह निर्भर करता है मौसम पर। यह देखा गया है गेहूँ को सबसे कम पानी की आवश्यकता जनवरी माह में और सबसे ज्यादा पानी आवश्यकता होती है मार्च के महीने में दिसम्बर और फरवरी माह में फसल को पानी की औसत आवयकता रहती है। सिंचाई कब देनी है इसका निर्णय करने का एक तरीका यह है कि खेत कितना सूख रहा है उस पर नजर रखी जाय और उसी अनुसार पानी दिया जाय। खेत की नमी नापने के लिये Tensiometer जैसे उपकरणों को खेत में लगाना आवश्यक होता है। दूसरा तरीका है फसल की उन अवस्थाओं पर पानी दिया जाय जो सिंचाई के लिये बहुत महत्वपूर्ण है। इन अवस्थाओं में पहली सिंचाई शीर्ष या शिखर जड़ निकलने पर देना आवश्यक माना गया है। बौने गेहूँ में शीर्ष या जड़ निकलने की अवस्था बुवाई के 20-25 दिन बाद आती है। गेहूँ की यह अवस्था पहली सिंचाई के लिये बहुत महत्वपूर्ण है अतः इस अवस्था पर पानी देना न चूकें। धन्यवाद।



26 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । आप सभी को CCAFS का नमस्कर। हमने आप को फसल उत्पादन में हुए खर्च का हिसाब रखने की सलाह दी थी लेकिन अधिकतर लोगों ने इस सलाह पर अमल नहीं किया है। यह जानने के लिये की हमारे द्वारा बताये गयें उपायों से आप को क्या लाभ हो रहा है और खेती में कुल लागत कितनी आई है इसके लिये हिसाब कितना रखना जरूरी है। गेहूँ की खेती में खेत की तैयारी, बुवाई, बीजोपचार, सिंचाई, खाद और दवा का उपयोग आपने अब तक किया है। याद करके इसका खर्चा लिख लीजिएं। इसी तरह मजदूरी का भी हिसाब रखें। फसल कटने पर उपज का हिसाब रखते हुए आपसे गेहूँ उत्पादन में हुए आप-व्यय् पर विचार करेंगें और उन उपायों की भी चर्चा करेगें जिन से खेती की लागत कम हुई है और उपज बढी है। कृपया गेहूँ की खेती का हिसाब रखना आरम्भ किया जाये। धन्यवाद।



27 NOVEMBER

Morning:

यह संदेश क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों के लिये CCAFS द्वारा दिया जा रहा है। यदि आप रसायनिक कीटनाशी दवा का उपयोग नहीं करना चाहते हैं तो आप जैवकीट नाशी का उपयोग कर सकते हैं। यहां तक की आप नीम के पत्तों से स्वंय कीटनाशी दवा भी बना सकते हैं। एक बाल्टी में नीम की पत्तियां भर दें फिर बाल्टी में पानी भर कर चार दिन तक छोड़ दें। पांचवे दिन पत्तियों को अच्छी तरह मिला कर इस घोल को छान लें। छानने के बाद एक ग्राम सर्फ या कपड़ा धोने वाला साबुन प्रति लीटर घोल के हिसाब से मिलाकर छिड़काव करें। नीम की पत्तियों से बने इस जैव कीटनाशी दवा में पिल्लू, भृंग, फनगा, दीमक आदि कीटों का निर्माण करने की क्षमता है। नीम के बीज और नीम के तेल से भी कीटनाशी तैयार किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



27 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को यह संदेश CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। मौसम के बदलाव से खेती को काफी नुकसान हो सकता है। फसल के बढवार और पकाव के लिये अगर अनुकूल तापमान और नमी वातावरण में नह होती है फसल के अंकुरण, जमाव, बढवार, दानों के वजन में कमी आ जाती है। फसल नष्ट भी हो सकती है या उपज में कमी आ सकती है। सरकार ने रबी फसल के मौसम आधारित फसल बीमा बनाई है। प्राकृतिक आपदा को ध्यान में रखते हुए कृषि योजना में सुधार किया गया है। इससे प्राकृतिक आपदा जो मौसम के बदलाव से सीधी सम्बन्धित है जैसे पाला, सूखा, ओलावृधी, भूकंप, भूस्खलन, फसल में बीमारी और कीट प्रकोप आदि कई परिस्थितियों से फसल की सुरक्षा कर बीमा राशि के भूगतान को शामिल किया गया। अपने निकटतम कृषि कार्यलय कृषि ऋण देने वाली सहकारी व अन्य बैंक तथा बीमा कम्पनी के कर्मचारी से सम्पर्क कर फसल बीमा कराये और फसल के नुकसान के जोखिम से अपने आप को बचायें। धन्यवाद।



28 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। गेहूँ की खड़ी फसल में सामान्यतौर पर नाइट्रोजन देने के लिये दो बार यूरिया दिया जाता है। पहली बार यूरिया पहली सिंचाई के साथ शीर्ष या शिखर जड़ निकलने की अवस्था पर देना चाहिये। इस समय पर यूरिया देना फसल की वानसपतिक बढवार में मदद करता है। फसल में लगने वाली कुछ नाइट्रोजन की एक तिहाई क्षेत्र में 35-40 किल¨ग्राम यूरिया देना पर्याप्त होगा। हल्की भूमि में जहां नहर से सिंचाई होती है, यूरिया सिंचाई के एक-दो दिन बाद जब खेत में बत्तार आजाय तब देना चाहिये। खेत में यूरिया धूप में खुला नहीं रहना चाहियें इसलिये शाम के समय यूरिया दें या गुड़ाई कर उसे मिट्टी में मिलायें।ओस से गीले पत्तियों पर भी यूरिया नहीं गिरना चाहिये, यदि नीम लेपित काम में लेगें तो उसका प्रभाव साधारण यूरिया से ज्यादा होगा। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



28 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों के लिये यह संदेश CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। गांवों में हम खाना पकाने के लिये अकसर लकड़ी, उपले और कोयला काम में लेते हैं। यह सब साधन हवा में कार्बन डाई आक्साइड और अन्य गैस छोड़ते हैं जो वायुमण्डल को प्रदूषित कर जलवायु परिवर्तन की इस प्रक्रिया को रोकने के लिये यह आवश्यक है हम ईधन के लिये कुछ और साधन काम में लें। सूर्च-उर्जा और गोबर गैस इस लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। गोबर गैस से तो उर्जा और खाद-दोनों ही मिलते हैं। गोबर गैस से सिर्फ चुल्हा ही नहीं, बिजली का प्रकाश भी मिल सकता है। यदि पर्याप्त मात्रा में गैस बने तो इससे ईजन भी चला सकते हैं। अपने पशुओं की संख्या को ध्यान में रहते हुए गोबर गैस सयंत्र की साइजतय करें। गोबर गैस बनाने के लिये सरकार से अनुदान भी उपलब्ध है। गोबर गैस के उपयोग से घर का वातावरण भी धुंआ रहित रहता है जिससे श्वांस और आखों की बीमारी से बचाव होता है।



29 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । आप सभी को CCAFS का नमस्कर। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अगले तीन-चार दिन आपके जिले में मौसम साफ और शुष्क रहेगा। दिन का अधिकतम तापमान 26-28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 12-13 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। सुबह के समय हवा में नमी 30-40% और दोपहर में 14-16 डिग्री प्रतिशत रह सकती है। 6-10 किलोमीटर प्रति घन्टा की रफतार से पिछवा हवा चलने का अनुमान है अपने गेहूँ के खेतों में अकुंरण, दीमक प्रकोप आदि पर नजर रखें। शीर्ष जड़े निकलने की अवस्था पर पहली सिंचाई की व्यवस्था करें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



29 NOVEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । आप सभी को CCAFS का नमस्कर। गेहूँ में खाद के उपयोग और उसकी मात्रा तय करने के लिये हमने NUTRIENT EXPERT यानि पोषक विशेषक्ष एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें आपके खेत की मिट्टी, फसल चक्र, सिंचाई प्रबन्ध, बुवाई का तरीका, पौधा सरथा उपज को लक्ष्य और उपलब्ध खाद और उर्वरक को ध्याम में रखते हुए आपके खेत के लिये पोषक तत्वों की मात्रा बताई जाती है। CCAFS के वैज्ञानिक को आप अपने खेत, फसल, पानी उर्वरक और उपज की जानकारी देकर उनसे गेहूँ में पोषक तत्व की सिफारिश प्राप्त कर सकते हैं यदि आपने मिट्टी के नमूने की जांच नही भी कराई है तो भी आपको उर्वरक उपयोग की सही सिफारिश मिल जायेगी। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



30 NOVEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। जो लोग नवम्बर के महिने में गेहूँ की बिजई नहीं कर पाये हैं उनके अब देर से बिजाई के के लिये सिफारिश की गई किस्मों से किसी एक किस्म की बिजाई करनी चाहियें। देर से बिजाई के लिये HD-3059, HD-2985, WR-544, PBW-373, DBW-16, WH-1021, PBW- 590 और UP-2425 किस्म की सिफारिश है। इन किस्मों की उपलब्धी देखते हुए किसी एक किस्म का चुनाव करें और दिसम्बर के तीसरे सप्ताह तक अवश्य बिजाई करे दें। इन किस्मों से प्रति एकड़ 16-18 क्विंटल उपज प्राप्त हो सकती है। ये किस्में 120-125 दिन में पक कर तैयार हो जायेगी |



30 NOVEMBER

Evening :

यह संदेश CCAFS द्वारा करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को दिया जा रहा है। गेहूँ की खड़ी फसल में रासायनिक विधि से खरपतवार नियंत्रण करना लाभदायक पाया गया है। आजकल बाजार में कई नामों से खरपतवार नाशी रसायन मिल रहे हैं। खरीदने से पहले यह देखे कि रसायन-चौड़ी और सकड़ी पत्ती वाले खरपतवारो नियंत्रण करने योग्य है। रसायन के डब्बों पर लिखे निर्देश भी ध्यानपूर्वक पड़े । रसायन की मात्रा और पानी की मात्रा को ध्यान रखते हुए सही घोल बनाये। अलग अलग रसायनों की मात्रा अलग अलग हो सकती है। सिफारिश की गई मात्रा से ज्यादा के उपयोग कर्ने पर फसल को नुकसान हो सकता है। गेहूँ की बालियां मुड़ी हुई, डेढ़ी और छोटी रह सकती है। एक्सियल, टोपिक, पूमा सुपर या पूमा पावर जय विजय, प्वाइंट, टोटल, एटलांटिस, वेस्टा एकार्ड, लीडर, सफल आदि व्यवसायिक नामों से खरपतवानाशी बाजार में है। इनकी निर्धारित मात्रा पर ध्यान दें। बिजाई या बुवाई के 30-35 दिन बाद रसायन की सिफारिश की गई मात्रा को 200-250 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ क्षेत्र पर छिड़काव करें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।


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